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बबीता बर्थडे स्पेशल: कम फिल्मों में ही बनाई बड़ी पहचान, बेटियों को बनाया सुपरस्टार

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20 अप्रैल 1947 को कराची में जन्मीं बबीता ने 60-70 के दशक में बॉलीवुड में अपनी खास पहचान बनाई। शादी के बाद फिल्मों से दूरी बनाकर उन्होंने अपनी बेटियों करिश्मा और करीना को सुपरस्टार बनाया।

हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर में कई ऐसी अभिनेत्रियां हुईं, जिन्होंने कम समय में ही अपने अभिनय से दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी। उन्हीं में एक नाम है Babita Kapoor का, जिनका करियर भले ही ज्यादा लंबा नहीं रहा, लेकिन उनकी फिल्मों और किरदारों की विविधता ने उन्हें अलग पहचान दिलाई। 20 अप्रैल 1947 को कराची में जन्मीं बबीता का जीवन और करियर दोनों ही उतार-चढ़ाव से भरा रहा, लेकिन उन्होंने हर दौर में खुद को मजबूती से साबित किया।

 बचपन से मिला फिल्मी माहौल

बबीता ऐसे परिवार में पैदा हुईं, जहां अभिनय और फिल्में रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा थीं। उनके पिता Hari Shivdasani खुद फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े हुए थे। यही वजह रही कि बबीता को बचपन से ही कैमरे और एक्टिंग की दुनिया से जुड़ने का मौका मिला। कम उम्र में ही उन्होंने फिल्मों में आने का फैसला कर लिया और अपने सपनों को साकार करने के लिए कदम बढ़ाया।

 फिल्मों में एंट्री और शुरुआती पहचान

साल 1966 में रिलीज हुई फिल्म दस लाख से बबीता ने बॉलीवुड में कदम रखा। उनकी पहली ही फिल्म में उन्होंने एक संवेदनशील और सादगी भरा किरदार निभाया, जिसने दर्शकों का ध्यान खींचा। इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में अलग-अलग तरह के रोल निभाकर यह साबित किया कि वे केवल ग्लैमरस किरदारों तक सीमित नहीं हैं।

फिल्म राज में उन्होंने Rajesh Khanna के साथ काम किया, जहां उनके अभिनय की खूब तारीफ हुई। हालांकि फिल्म बड़ी सफलता हासिल नहीं कर पाई, लेकिन बबीता को इंडस्ट्री में एक मजबूत पहचान मिल गई।

 स्टारडम की ओर बढ़ते कदम

बबीता के करियर का बड़ा मोड़ फिल्म फर्ज साबित हुई, जिसने उन्हें एक लोकप्रिय अभिनेत्री के रूप में स्थापित कर दिया। इसके बाद हसीना मान जाएगी जैसी फिल्मों में उन्होंने अपने कॉमिक अंदाज से दर्शकों को खूब हंसाया, वहीं किस्मत जैसी फिल्मों में उन्होंने गंभीर किरदार निभाकर अपनी बहुमुखी प्रतिभा दिखाई।

उनकी खासियत यही थी कि वे हर किरदार में ढल जाती थीं—चाहे वह रोमांटिक हो, पारिवारिक हो या फिर हल्का-फुल्का कॉमिक रोल। इसी वजह से उनका छोटा सा करियर भी काफी प्रभावशाली बन गया।

 अलग-अलग किरदारों में दिखाई versatility

1969 में आई फिल्म एक श्रीमान एक श्रीमती में बबीता ने एक आधुनिक और आत्मविश्वासी युवती का किरदार निभाया, जो उस समय के हिसाब से काफी नया और बोल्ड माना जाता था। इसके अलावा तुमसे अच्छा कौन है और अनजाना जैसी फिल्मों में उन्होंने पारिवारिक और भावनात्मक किरदारों को बखूबी निभाया।

 प्यार, शादी और जिंदगी का नया मोड़

साल 1971 में फिल्म कल आज और कल के दौरान उनकी मुलाकात Randhir Kapoor से हुई। साथ काम करते-करते दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और जल्द ही उन्होंने शादी कर ली। शादी के बाद बबीता ने फिल्मों से दूरी बना ली और अपने परिवार को प्राथमिकता दी।

उनके ससुर Raj Kapoor का परिवार में एक सख्त नियम था कि घर की महिलाएं फिल्मों में काम नहीं करेंगी। इस परंपरा के चलते बबीता ने अपने करियर को पीछे छोड़ दिया।

 संघर्ष और जिम्मेदारियों का दौर

शादी के बाद जहां एक ओर उन्होंने परिवार को संभाला, वहीं दूसरी ओर उन्हें कई चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा। रणधीर कपूर का फिल्मी करियर ज्यादा सफल नहीं रहा, जिससे आर्थिक स्थिति पर असर पड़ा। ऐसे समय में बबीता ने हिम्मत नहीं हारी और अपने बच्चों के भविष्य को प्राथमिकता दी।

 बेटियों को बनाया सुपरस्टार

बबीता की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि उन्होंने अपनी बेटियों Karisma Kapoor और Kareena Kapoor Khan को फिल्म इंडस्ट्री में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई। कपूर खानदान की परंपरा को तोड़ते हुए उन्होंने अपनी बेटियों को फिल्मों में आने के लिए प्रोत्साहित किया।

करिश्मा कपूर 90 के दशक की सुपरस्टार बनीं, वहीं करीना कपूर खान आज भी बॉलीवुड की टॉप अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं। यह बबीता की परवरिश और दूरदर्शिता का ही नतीजा है कि उनकी दोनों बेटियां इंडस्ट्री में इतना बड़ा मुकाम हासिल कर सकीं।

 विरासत जो आज भी जिंदा है

बबीता का करियर भले ही छोटा रहा, लेकिन उन्होंने जो पहचान बनाई, वह आज भी कायम है। उन्होंने यह साबित किया कि अभिनय की दुनिया में लंबा करियर ही सफलता का पैमाना नहीं होता, बल्कि काम की गुणवत्ता और विविधता ही असली पहचान बनाती है।

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